मुकाबला: चुनाव में बदलते मुद्दों से मिलेगा फायदा?

देश में जब भी चुनाव होते हैं तो एक अनोखा चलन चलता है और वो है व्यक्तिगत टिप्पणी करने का चलन. जिसे यूपी, गुजरात और कई चुनावों में देखा जा चुका है. राजनीतिक प्रतिद्वंधियों के बीच मुकाबला मुद्दों से शुरू होकर व्यक्तिगत टिप्पणियों पर खत्म होता है. बीजेपी ने पहले नामुमकिन को मुमकिन बनाने पर बात की, फिर कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर बात की और फिर राष्ट्रवाद और साध्वी प्रज्ञा से होकर आखिरी चरण में बातचीत गालियों और पर्सनल कमेंट्स पर पहुंच गई. कांग्रेस ने भी व्यक्तिगत टिप्पणी करने से गुरेज नहीं की. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस व्यक्तिगत टिप्पणियों की लड़ाई में असल मुद्दे कहां हैं?

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