भारतीय राजनीति सबसे ज़्यादा जाति की ही बात करती है. पार्टियां जाति के आधार पर टिकट बांटती हैं, नेता जातिगत पहचान के सहारे वोट मांगते हैं, चुनाव जीतने की उम्मीद करते हैं. मीडिया भी अपने राजनैतिक समीकरणों का हिसाब लगाते हुए सबसे ज़्यादा जातियों के अनुपात पर ही ध्यान रखता है. आप कह सकते हैं कि अगर जाति भारतीय समाज की सच्चाई है तो भारतीय राजनीति इससे आंख कैसे चुरा सकती है.
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