डॉ. प्रणॉय रॉय और दोराब सुपारीवाला ने मिलकर चुनावों पर एक किताब लिखी है, जिसका नाम है 'दि वर्डिक्ट.' पेंग्विन से छपी इस किताब में दोनों का रिसर्च बताता है कि हमारी चुनाव व्यवस्था में मतदाताओं को अब भी बाहर रखना मुमकिन है. मतदान प्रतिशत को कामयाबी बताने के तमाम दावों के बाद भी बहुत से लोग मतदान नहीं दे पाते हैं क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है. अब पूरे देश में महिला मतदाताओं पर एक नज़र डालते हैं... इन चुनावों में अब तक 2.1 करोड़ महिलाएं मतदाता सूचियों से ग़ायब हैं... देश में 18 साल से ऊपर की महिलाओं की तादाद 45 करोड़ दस लाख है लेकिन मतदाता सूचियों में 43 करोड़ महिला मतदाताओं के ही नाम हैं... 2.1 करोड़ महिलाओं के नाम भी मतदाता सूची में डालने की ज़रूरत है...यूपी की वोटर लिस्ट देखें तो यहां मतदान कर सकने वाली 68 लाख महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं... इस तरह से हर लोकसभा क्षेत्र में औसतन 85 हज़ार महिलाएं मतदाता लिस्ट से ग़ायब हैं... ये अपने आप में बड़ी चिंता की बात है..
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