आदर्श गांव, स्मार्ट सिटी- ये सब बहुत सुंदर जुमले हैं. सुनिए तो लगता है कि इनकी मार्फत देश की तस्वीर और तक़दीर बदलने वाली है. सांसदों से कहा जाता है कि वो गांवों को गोद लें. उनका विकास कराएं. सांसद धूमधाम से गांवों को गोद लेने का एलान करते हैं. लेकिन ये धूमधाम ज़्यादा दिन नहीं टिकती. कुछ रंग-रोगन, कुछ चमक-दमक मीडिया में दिखती है और इसके बाद गांव फिर धूल का फूल हो जाते हैं. सांसद उन्हें भूल जाते हैं.
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